यह ब्लॉग खोजें

गुरुवार, 16 जनवरी 2025

22/11/2024 जुम्मा खुतुबा (क़ियामत की निशानियाँ- 7)


बिस्मिल्लाह इर रहमान इर रहीम

जुम्मा खुतुबा

 

हज़रत मुहयिउद्दीन अल-खलीफतुल्लाह

मुनीर अहमद अज़ीम (अ त ब अ)

 

22 November 2024

(19 Jamaad'ul Awwal 1446 AH)

 

 

दुनिया भर के सभी नए शिष्यों (और सभी मुसलमानों) सहित अपने सभी शिष्यों को शांति के अभिवादन के साथ बधाई देने के बाद हज़रत खलीफतुल्लाह (अ त ब अ) ने तशह्हुद, तौज़, सूरह अल फातिहा पढ़ा, और फिर उन्होंने अपना उपदेश दिया: शैतानों के पास ताकत नहीं है (क़ियामत की निशानियाँ- 7)

 

क्या तुम नहीं देखते कि हमने इनकार करनेवालों पर शैतान को भेजा है, ताकि वे उन्हें और भड़काएँ? अतः तुम उनके विरुद्ध शीघ्रता (haste) न करो, हम उनके दिन गिन रहे हैं। जिस दिन हम ईश्वर से डरने वालों को (एक सम्मानित) प्रतिनिधिमंडल के रूप में परम दयालु के सामने इकट्ठा करेंगे, और पापियों को प्यासे झुंड की तरह नरक में धकेल देंगे।' (सूरह मरयम, 19: 84-87)

 

मृत्यु के बाद जीवन का हिसाब होगा। यह एक निश्चितता है । इसके बारे में कोई संदेह नहीं है।

 

इस धरती पर प्रत्येक बच्चे के जन्म के समय, अल्लाह उन्हें परीक्षण करने, उन्हें आकार देने के लिए एक वातावरण प्रदान करता है, और उसके बाद अल्लाह उन्हें सही और गलत के बीच अंतर करने के लिए अपना मार्गदर्शन भेजता है। यही कारण है कि जब अल्लाह किसी को इस्लाम में जन्म देता है तो यह एक असाधारण सम्मान की बात होती है, जो कि प्राकृतिक और सच्चा मार्ग है जिसे अल्लाह ने पृथ्वी पर मानव जाति के लिए स्थापित किया है।

 

जब वे अपनी माताओं के गर्भ में होते हैं, तो सभी शिशुओं को शैतान द्वारा छुआ जाता है, लेकिन जैसा कि मैंने आपको पिछले शुक्रवार को बताया था, हमारे प्यारे पैगंबर हजरत मुहम्मद (स अ व स) की यह हदीस है [सहीह बुखारी में पाई जाती है और हजरत अबू हुरैरा (र अ) द्वारा सुनाई गई है] जो हमें बताती है कि केवल हजरत ईसा (अ स) को शैतान ने छुआ नहीं था। अल्लाह के चिन्ह और चमत्कार को अल्लाह ने सुरक्षित रखा ताकि शैतान उसे छू न सके, जहाँ शैतान हज़रत मरियम (..) के गर्भाशय की केवल एक परत को छूने में सफल रहा, उनके बच्चे को नहीं।

 

यहाँ हम पाते हैं कि हज़रत मुहम्मद (स अ व स) ने स्वयं को अपवादों (exceptions) में शामिल नहीं किया। उन्होंने सृष्टि के आरंभ से लेकर अपने समय तक, अर्थात् हज़रत मुहम्मद (स अ व स) के समय तक केवल हज़रत ईसा (..) का उल्लेख किया है, और हम पाते हैं कि प्रत्येक पैगम्बर के लिए, उन्हें इस धरती पर किसी भी अन्य लोगों से अलग करने के लिए कुछ चमत्कार या संकेत किए गए थे, विशेष रूप से उनके अपने समय में जब अल्लाह ने उन्हें भेजा था।

 

लेकिन हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के आगमन के साथ, जो सभी नबियों के प्रमुख, मुहर, सम्माननीय हैं, अल्लाह ने चमत्कार और निशानियाँ प्रकट कीं, जो उसने पहले सभी नबियों के समय में प्रकट की थीं, ऐसे चमत्कार जिनका उल्लेख उसने स्वयं पवित्र कुरान में किया है, और जो क़यामत के दिन तक बने रहेंगे।

 

 

इस प्रकार, इससे हमें यह समझ में आता है कि जब अल्लाह का चमत्कार काम करता है और अल्लाह कुछ आदेश देता है, तो चाहे शैतान और उसकी सेना कितनी भी साजिश क्यों न करें, वे सफल नहीं होंगे।

 

पैगम्बर, सन्देशवाहक, सुधारक और धर्मपरायण लोग सभी अल्लाह के सम्माननीय प्रतिनिधिमण्डल का हिस्सा हैं। क़यामत के दिन वे अल्लाह की कृपा से नरक से बच जायेंगे। यहाँ, मैंने जो आयतें पढ़ी हैं, उनमें अल्लाह अपनी रहमत (कृपा) की बात करता है; ऐसी कृपा जो सभी पापों को मिटा देती है और आत्मा को पहले की तुलना में अधिक शुद्ध बना देती है।

 

यह स्पष्ट करना अच्छा है कि हज़रत ईसा (..) के साथ जो चमत्कार हुआ, अल्लाह हज़रत ईसा (..) के युग और क़यामत के दिन के बीच के समय में इस चमत्कार को बार-बार दिखाता रहेगा, और यह आशीर्वाद हज़रत मुहम्मद (स अ व स) के अनुयायियों को दिया जाएगा। हज़रत ईसा (..) के सच्चे उत्तराधिकारी निश्चित रूप से हज़रत मुहम्मद (स अ व स) के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस्लाम वह सत्य है जो अल्लाह की ओर से आता है और जो कोई भी इस्लाम का पालन करने और एक अच्छा मुसलमान बनने का आशीर्वाद प्राप्त करता है, उस व्यक्ति पर, उसके भीतर अल्लाह की छाप प्राप्त होगी, और अल्लाह उस पर अपने आशीर्वाद की वर्षा करेगा।

 

 

आज विश्व में हम देखते हैं कि किस प्रकार बड़े देशों और यहां तक ​​कि छोटे देशों के नेता भी ऐसे निर्णय लेते हैं जो मानवतावाद और मानव जीवन के संरक्षण के विरुद्ध हैं। कुछ लोग अपने साथियों को नष्ट करना चाहते हैं। क्यों? क्योंकि वे अपने साथियों से अधिक शक्ति और क्षेत्र चाहते हैं! अल्लाह कहता है कि यह शैतान है जो ऐसे इंसानों को उनके पापों में उकसाता है, और वे इतने अंधे हो जाते हैं कि वे सच्चाई के लिए सारी ईमानदारी खो देते हैं। सत्ता और धन की उनकी प्यास, क्षेत्रों की उनकी प्यास और अपने साथियों की तुलना में अधिक शक्तिशाली बनने की उनकी लालसा, उन्हें प्रतिशोध के लिए अन्य क्षेत्रों पर बमबारी करने के लिए प्रेरित करती है। हमने फिलिस्तीन और लेबनान में इजरायल द्वारा किए गए नरसंहारों को देखा है, हमने मुसलमानों के खिलाफ सभी इस्लाम विरोधी देशों के उत्पीड़न को देखा है, जैसे कि चीन, बर्मा, भारत, आदि, लेकिन मैं आपको यह भी बता दूं कि इसमें अरब दुनिया भी शामिल है।

 

थौबन (Thauban) (रजि.) द्वारा वर्णित एक हदीस में, पवित्र पैगंबर मुहम्मद (स अ व स) ने कहा: "जब तक मेरी उम्मत के कबीले मूर्तिपूजकों के साथ एकजुट नहीं हो जाते और जब तक वे मूर्तियों की पूजा नहीं करते, तब तक प्रलय स्थापित नहीं होगा..." (दाऊद, तिर्मिज़ी) 

 

 

आजकल हम देखते हैं कि यह भविष्यवाणी कैसे सच हो गई है। पैसे और ताकत ने अरब-मुस्लिम दुनिया को और यहाँ तक कि दुनिया भर के गैर-अरब मुसलमानों को भी अंधा कर दिया है। हम देखते हैं कि कैसे मुसलमानों ने खुद को सच्चे इस्लाम से अलग कर लिया है। उन्होंने अपने आचरण और व्यवहार में पश्चिम की नकल की है और इन व्यवहारों और पहनावे के तरीकों को इस्लाम में शामिल कर लिया है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि हम कयामत के बीच में हैं। इस घड़ी की अवधि केवल अल्लाह ही जानता है कि हम कब तक इस अवस्था में रहेंगे, यहाँ तक कि सब कुछ समाप्त हो जाएगा, और हमारा समय [अल्लाह के सामने] हिसाब में आ जाएगा। लेकिन फिर भी, हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने हमें इस विषय पर थोड़ा और ज्ञान दिया जब बेडौइनों (Bedouins) का एक समूह उनसे मिलने आया और उन्होंने उनसे पूछा: 'क़यामत कब आएगी?' तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उनमें से सबसे छोटे (उपस्थित) की ओर देखा और उन्होंने (सल्ल.) कहा: 'यदि यह अधिक उम्र तक जीवित रहेगा, तो आपका समय (आपकी मृत्यु) आ जाएगा।'

 

 

तो, यहाँ यह स्पष्ट है कि हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जबअस-साअत” (“As-Sa’at”) (क़ियामत) की बात कर रहे थे, तो उनका इशारा मौत की ओर था।  प्रत्येक व्यक्ति के लिए उसकी मृत्यु का समय निर्धारित है। उनकी मृत्यु क़ियामत (प्रलय का दिन)  है। जब मृत्यु आती है, तो सभी आत्माएं एक स्थान में प्रवेश करती हैं, जो न्याय और उनके गंतव्य (destination) के बीच का चरण है, जो या तो स्वर्ग या नर्क है। 

 

लेकिन यहां सूरह मरियम की इन आयतों में अल्लाह कहते हैं कि ऐसे शैतान हैं जो अपने अनुयायियों को, जो इस दुनिया से जुड़े हुए हैं, नरक की ओर और बुरे कर्मों की ओर उकसाते हैं। सोचें कि जब कोई व्यक्ति धरती पर बुरा काम करता है, और वह अपने गलत कामों की सीमा पार कर जाता है, और वह अल्लाह को भूल जाता है, वह कुरान के मार्गदर्शन को भूल जाता है या नहीं सुनता है, और वह अपने व्यवहार को बेहतर बनाने का प्रयास नहीं करता है, तो अल्लाह शैतान को उसके ऊपर हावी होने देता है और उन्हें उसके बुरे कामों में और अधिक उकसाता है, इस प्रकार उसे नरक में जगह की गारंटी देता है।

 

यह अफ़सोस की बात है कि फ़िलिस्तीन में इज़रायल ने जो क्रूरता और नरसंहार किया है, उसके बावजूद यूक्रेन और रूस के बीच अभी भी बमबारी हो रही है। और अधिक मौतें होंगी। यूक्रेन के लोगों को विनाश का सामना करना पड़ा, और अब रूस के लोगों को भी। यह जनता ही है जो अपने नेताओं की मूर्खता की कीमत चुकाती है, और यहां संयुक्त राज्य अमेरिका रूस को निशाना बनाकर स्थिति को भड़काने की कोशिश कर रहा है। लेकिन पुतिन (Putin) ऐसे नेता नहीं हैं जो निष्क्रिय (idle) बैठे रहेंगे और यह स्थिति और बढ़ेगी।

 

जैसा कि मैंने आपको पहले ही बताया है, हम लंबे समय से तीसरे विश्व युद्ध के चरण में प्रवेश कर चुके हैं। सीरिया, लेबनान, फिलिस्तीन आदि सभी अरब-मुस्लिम देशों पर या तो गैर-मुस्लिम गैर-अरबों द्वारा, या यहां तक ​​कि उन देशों द्वारा भी हमला किया गया है जो मुस्लिम होने का दावा करते हैं, उदाहरण के लिए, तुर्की। यहां हम पाते हैं कि बदले की नीति अपनाई जा रही है। लेकिन जैसा कि अल्लाह कुरान में कहता है, प्रतिशोध (vengeance) में भी कोई ज्यादती (excess) नहीं होनी चाहिए, और इस बात के अकाट्य सबूत (irrefutable evidence) होने चाहिए कि अंकारा (Ankara) पर हमले सीरिया से हुए थे।

 

इसलिए, मैं मानवता से अपील करता हूं कि हम युद्ध के ऐसे चरण में प्रवेश कर चुके हैं जो और भी गंभीर हो सकता है। यदि व्लादिमीर पुतिन परमाणु बम गिराने की अपनी धमकी को अमल में लाते हैं, तो दुनिया में स्थिति वास्तव में दुनिया के अंत जैसी हो जाएगी, जहां मानव जीवन, और सिर्फ मानव जीवन ही नहीं, बल्कि पौधे, हवा और पृथ्वी भी विषाक्त और रहने योग्य नहीं रह जाएंगे। तो सवाल उठता है: क्या यही वह भविष्य है जिसे हम अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित रख रहे हैं? क्या नई पीढ़ियाँ जो बड़ी हो रही हैं, वे आने वाले इस महायुद्ध और विश्व के भूभागों को नष्ट करने वाले इस महाविनाश का सामना करने के लिए शारीरिक, नैतिक और आध्यात्मिक रूप से सुसज्जित (equipped) हैं?

 

इसलिए, एक रसूल के रूप में जिसे अल्लाह ने तुम्हें चेतावनी देने, सावधान करने के लिए इस धरती पर भेजा है, अपने बच्चों को (सच्ची) मानवता, एक-दूसरे के प्रति सम्मान की शिक्षा दीजिए। उन्हें धन या सांसारिक वैभव (worldly grandeur) का प्यासा मत बनाओ, बल्कि उन्हें इस्लाम से जोड़ो। यह एक ईश्वर, अर्थात् सृष्टिकर्ता, में उनका विश्वास ही है जो उन्हें सबसे बुरी परिस्थितियों से बचाएगा। अल्लाह उन लोगों के साथ है जो उसके साथ हैं। वह उन्हें कभी नहीं छोड़ेगा। वह उन लोगों के लिए मौजूद रहेगा जो उसके लिए काम करते हैं। और उन लोगों को उसके पास से अनन्त पुरस्कार मिलेगा। जो कोई भी अल्लाह का चेहरा देखना चाहता है, उसे दिल की ईमानदारी के साथ अल्लाह के मार्ग के लिए काम करना चाहिए, उन्हें दुनिया में शांति और सच्ची ईश्वरीय शिक्षाओं की सुरक्षा के लिए प्रयास करना चाहिए।

 

 

अल्लाह सच्चे मोमिनों और हमारी आने वाली पीढ़ियों को उन गैर-विश्वासियों के अत्याचारों से बचाए जो शैतान को बुरे कामों में उकसाने देते हैं। अल्लाह सब कुछ नष्ट करने से पहले दुनिया में इस्लाम की शान को बहाल (restore) करे। इंशाअल्लाह, आमीन। वाकई जीत सिर्फ अल्लाह और उसके रसूलों की है और हम ही उस दिन विजयी होंगे जिस दिन सभी लोग उठाए जाएंगे, इंशाअल्लाह, आमीन। अल्लाह हमें उस दिन के डर से बचाए और हमारी गरिमा, हमारा सम्मान बहाल (restore) करे और हमें अपना सर्वोच्च प्यार प्रदान करे। आमीन।

 

अनुवादक : फातिमा जैस्मिन सलीम

जमात उल सहिह अल इस्लाम - तमिलनाडु

सफ़र ज़िक्रुल्लाह (SAFAR ZIKRULLAH) और एरियल शेरोन (Ariel Sharon) का भाग्य

सफ़र ज़िक्रुल्लाह और एरियल शेरोन का भाग्य   वर्तमान युग में मुस्लिम जगत को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। शक्तिशाली शत्रुओं ने...