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रविवार, 16 अगस्त 2026

इमाम महदी (अ.स.) की दुआ

इमाम महदी (अ.स.) की दुआ


ऐ मेरे पालनहार!

अपनी कृपा से मेरी शक्ति बन,

मेरी दृष्टि को और मेरे हृदय में जो कुछ है उसे प्रकाशमान कर,

और मेरे जीवन तथा मेरी मृत्यु का उद्देश्य स्वयं बन जा।

मुझे अपने प्रेम से भर दे,

और मुझे ऐसा प्रेम प्रदान कर

जिससे बढ़कर मेरे बाद किसी का प्रेम न हो।

 

ऐ मेरे पालनहार!

मेरी दुआओं को स्वीकार कर,

मेरी इच्छाओं को पूरा कर,

मुझे पवित्र कर, मेरी रक्षा कर,

मुझे अपने निकट कर;

मेरा मार्गदर्शन कर,

मेरी सहायता कर और मुझे भलाई करने की सामर्थ्य प्रदान कर,

मुझे शुद्ध कर,

मेरी आत्मा को प्रकाशमान कर,

मुझे पूर्णतः अपना बना ले

और स्वयं को पूर्णतः मेरा कर दे।

 

ऐ मेरे पालनहार!

हर द्वार से मेरे पास आ,

हर पर्दे और रुकावट से मुझे मुक्त कर,

मुझे अपने हर आध्यात्मिक पेय का गहरा स्वाद चखा,

और मेरी नफ़्स की उठती हुई इच्छाओं और उसके प्रलोभनों के विरुद्ध मेरी सहायता कर।

मुझे जुदाई के गड्ढों

और उसकी विभिन्न अंधकारमय अवस्थाओं से सुरक्षित रख।

मुझे एक पलक झपकने के बराबर समय के लिए भी मेरे नफ़्स के हवाले न कर,

और मुझे उसकी बुराइयों से सुरक्षित रख।

मुझे अपनी ओर ऊपर उठाता और आगे बढ़ाता चला जा,

और अपने अस्तित्व को मेरे वजूद के हर कण में व्याप्त कर दे।

मुझे उन लोगों में शामिल कर

जो तेरे समुद्रों में स्वतंत्रतापूर्वक तैरते हैं,

तेरे प्रकाश के बाग़ों में स्वतंत्रतापूर्वक विचरण करते हैं,

और तेरे फ़ैसलों के जारी होने पर प्रसन्न रहते हैं।

और मेरे तथा तेरे अतिरिक्त हर वस्तु के बीच दूरी पैदा कर दे।

 

ऐ मेरे पालनहार!

अपनी कृपा और अपने मुख के प्रकाश के द्वारा

मुझे अपनी सुंदरता का दर्शन करा,

मुझे अपना पवित्र जल पिला,

और मुझे हर प्रकार के पर्दे और धुंध से मुक्त कर।

मुझे उन लोगों में न बना

जो फिर अंधकार और अज्ञानता की ओर लौट जाते हैं,

और जो आशीर्वाद, प्रकाश और नूर प्राप्त करने से वंचित रहते हैं।

जो अपनी त्रुटिपूर्ण बुद्धि और विकृत प्रयासों के कारण

सुख और आनंद के निवास से लौटकर

विनाश के स्थान की ओर चले जाते हैं।

मुझे अपनी प्रसन्नता के लिए सच्ची समर्पणशीलता प्रदान कर,

और अपनी उपस्थिति में सदैव के लिए सज्दा करने की अवस्था प्रदान कर।

मुझे ऐसा दृढ़ संकल्प प्रदान कर

जिस पर तेरी कृपापूर्ण दृष्टि पड़े।

और मुझे ऐसी कृपा प्रदान कर

जो तू केवल अपने विशेष रूप से चुने हुए बंदों को प्रदान करता है।

और मुझ पर ऐसी दया और रहमत नाज़िल कर

जैसी तू केवल अपने प्रिय बंदों पर नाज़िल करता है।

 

ऐ मेरे पालनहार!

मेरी अथक कोशिशों,

मेरे दृढ़ संकल्प,

मेरी दुआओं

और मेरे शब्दों के माध्यम से इस्लाम को पुनर्जीवित कर।

मेरे माध्यम से इस्लाम की सुंदरता,

उसकी भव्यता और उसकी गहराई को फिर से स्थापित कर,

और हर हठी विरोधी तथा उसके अहंकार को नष्ट कर दे।


 

ऐ मेरे पालनहार! मुझे दिखा कि तू मुर्दों को किस प्रकार जीवन प्रदान करता है।

मुझे ऐसे चेहरों का दर्शन करा

जो ईमान की सुंदरता को प्रकट करते हों,

ऐसी आत्माएँ दिखा

जिनमें बरकत वाली बुद्धिमत्ता हो,

ऐसी आँखें दिखा

जो तेरे भय से आँसू बहाती हों,

ऐसे दिल दिखा

जो तेरे ज़िक्र से काँप उठते हों।

और ऐसी पवित्र संतानें दिखा

जो सत्य और सीधे मार्ग का अनुसरण करती हों,

और उन लोगों की छत्रछाया में शरण लेती हों

जो अल्लाह में खोए हुए हैं

और उसके चुने हुए बंदे हैं।

मुझे उन लोगों को दिखा

जो तौबा की ओर शीघ्रता से बढ़ते हैं,

और जो आख़िरत के निवास की तैयारी करते हैं।

 

 

--- कादियान के अल इमाम अल महदी हज़रत मिर्जा गुलाम अहमद (..) द्वारा [1835-1908], आइना--कमालत--इस्लाम, 1893 में प्रकाशित।

 

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इमाम महदी (अ.स.) की दुआ

इमाम महदी (अ.स.) की दुआ ऐ मेरे पालनहार ! अपनी कृपा से मेरी शक्ति बन , मेरी दृष्टि को और मेरे हृदय में जो कुछ है उसे प्रकाशमान...