अपने सभी चेलों सहित सभी नए चेलों, ( और दुनिया भर के सभी मुसलमानों) को शांति का अभिवादन करने के बाद हज़रत ख़लीफ़तुल्लाह (अ त ब अ) तशहुद ,तौज, सूरह अल फातिहा पढ़ने के बाद और फिर उन्होंने अपना उपदेश दिया।
अल्लाह कि विशेषता (भाग 5)
अल्लाह की कृपा से मैं अपने शुक्रवार उपदेश में अल्लाह कि विशेषता के 5 वें भाग को जारी रखता हूँ। इसलिए अल्लाह हमें बताता है कि वह अपने सेवकों पर सर्वोच्च है। वह सभी पर नियंत्रण और पूर्ण शक्ति रखता है। उसके पास सब कुछ नष्ट करने की शक्ति है, वह दंड देने की शक्ति रखता है। यह वह है जो मौत देता है और यह वह है जो जीवन देता है। और यह है जिसने आपकी सुरक्षा के लिए सभी व्यवस्थाएं की हैं ताकि आप उसके फरमान से खुद को नष्ट नहीं करते। और यह वो विषय है जिसका उल्लेख कुरान ने अन्य स्थानों पर किया है, कि आपने बहुत सारे पाप किए हैं; बहुत सारे गुनाह है कि यह पूरी तरह से उचित होगा कि अल्लाह तुम्हें बिलकुल समाप्त कर देता। ऐसा करना न केवल आप के लिए, बल्कि सभी प्रकार के जीव के लिए भी, आपके अधिकार के भीतर होगा।
कुरान में एक और स्थान पर, इसके परिणाम के रूप में उल्लेख किया गया है कि प्रत्येक व्यक्ति के लिए, भले ही वह खुला़ या छिपा हो, भले ही वह शाम को या व्यापक रूप से दिन के उजाले में बाहर जाए, अल्लाह ने उसकी रक्षा के लिए उस पर पहरेदार [संरक्षक] रख दिए हैं। उसकी रक्षा करने के लिए, पर किससे? उसे अल्लाह के फरमानों से बचाना।
तो यहाँ हम किस विषय के साथ काम कर रहे हैं? वास्तव में, यह अति दिव्य हुक्मनामा है जो जन्म देता है और यह अति दिव्य फरमान है जो मृत्यु देता है। किसी के पास दिव्य हुक्मनामें के बिना मरने की क्षमता नहीं है। इसलिए यदि अल्लाह का फरमान आपको अपने मृत्यु के पास बुलाता है, फिर अल्लाह हमें बताता है कि यह उसका अति तक़दीर (फरमान) है, जो हमारी सुरक्षा कुछ समय के लिए करता है और हमें उसके दूसरे फरमान से भी बचाता है। अन्यथा अल्लाह पूरी तरह से श्रेष्ठ है। उसके पास इतनी शक्ति और क्षमता है कि वह सब कुछ खत्म और नष्ट कर सकता है, लेकिन वास्तव में यह उसका अति हुक्मनामा है जो आपको उसके दूसरे तक़्दीरों से बचाता है।
एक अन्य आयत में, अल्लाह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी रक्षा का हुक्मनामा जारी रहेगा जब तक उसकी मौत का फरमान नहीं आ जाता। जब मौत का वक्त आता है, उस समय, अल्लाह फ़रिश्तों से कहता है कि मौत का पैगाम लेकर और जाओ [आत्मा को सवालों में ले लो] और बिना किसी फ़ालतू चीज़ में फंसे हुए वापस आ जाओ, कोई अन्याय के बिना, और वास्तव में, वो करे जो अल्लाह ने उन्हें करने के लिए कहा था।
यहाँ वास्तव में हक्क शब्द, जैसा कि मैंने आपको समझाने के लिए उल्लेख किया था। तब यह उल्लेख किया गया है कि हर कोई इसी सच्चे मालिक के पास लौट आएगा। और आदेश भी अपने आप आएगा। और जल्द ही वह सभी खातों का निपटान करेगा।
अब "मालिकी यौमिद दीन" सच्चाई से जुड़ा हुआ है। यह कड़ी, हमारा ध्यान हमारे कार्य की ओर आकर्षित करती है। यह हमें अपने कार्यों की निगरानी करने के आदेश देता है। यह हमें चेतावनी देता है कि हम कभी भी अल्लाह सर्वश्रेष्ट से बच नहीं सकते। यह यक़ीनन, अल्लाह के पक्ष में है की उसके अन्य फरमानों को, जो अमल में है और हमारी रक्षा करने में जारी रखना हैं। लेकिन यह कुछ ऐसा है, जो मृत्यु तक रहेगा। जब मौत आएगी, तो वह अल्लाह के फरमान से आएगी। उस समय, आपको निर्णय के दिन के मालिक (गुरु) के सामने सच्चाई के साथ न्याय किए जाने के लिए उपस्थित होना होगा।
कुरान इस विषय को स्पष्ट रूप से समझाता है। अल्लाह सच्चा है; वह सत्य है और वह सच्चाई के साथ फैसला करेगा। उसने किसी के खिलाफ कोई ज्यादती नहीं की। वह न्याय, को पूर्ण न्याय के साथ करेगा और वह ऐसा मौजूद है, जो बहुत जल्दी खातों का निपटान करेगा। वह आपको कुछ समय देता है, जब तक आप इस लौकिक दुनिया में रहते हैं, लेकिन एक बार मर जाने के बाद, वह खातों का निपटान शुरू करने में बहुत समय नहीं लगाता।
इसके अलावा, अल्लाह वह ईश्वर है, जिसके पास पूर्ण, सर्वोच्च शक्ति है। वह श्रेष्ठ अस्तित्व की तरह प्रकट होता है, एक सच्चाई के रूप में भी, और इसलिए, जैसा कि मैंने आपको बताया था , यदि आप सज़ा से बचना चाहते हैं, फिर आपको सत्य को अपना मालिक बनाना चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही सच्चाई है। मौला का मतलब है पक्का साथी, जो कोई आपकी मदद करता है, जो आपकी रक्षा करता है। तो, अल्लाह खुद कहता है कि आप सभी को उस ही (अल्लाह, सच्चाई) की ओर वापस लौटना है और अगर इस दुनिया में आपने सत्य को नहीं अपनाया है और यदि आपने सच्चाई के साथ कोई संपर्क स्थापित नहीं किया है, फिर दूसरी दुनिया में उसका आपसे कोई संबंध नहीं होगा।
इसलिए, यदि आप सज़ा से बचना चाहते हैं, तब तो, आपको सच्चाई को अपना मौला बनाना चाहिए, अन्यथा आपको बचाया नहीं जाएगा। जिन लोगों ने इस दुनिया में असत्यता / झूटेपन को अपना साथी बनाया है, प्रत्येक कठिनाई के समय, वे झूठ के समर्थन को लेते हैं, प्रत्येक लोलुपता के समय, वे झूठ का सहारा लेते हैं, प्रत्येक प्रशंसा को प्राप्त करने की इच्छा के लिए, वे झूठ का सहारा लेते हैं, प्रत्येक खातों के निपटान से बचने के लिए, वे झूठ को अपनाते हैं, फिर उनका आंतरिक और बाहरी भाग पूरी तरह से झूठा हैं, और अगर निर्णय के दिन, वे खुद की रक्षा करने के लिए सच कहते हैं, तो यह एक बड़ा झूठ होगा। और कुरान ने यह उदाहरण दिया है, यह कहता है कि इस तरह के मूर्ख लोग भी होंगें, जो न्याय के दिन भी, अल्लाह के संरक्षण में आने के बजाय, वे झूठ में अपनी सुरक्षा को लेने की कोशिश करेंगे।
इसलिए, झूठ बोलने का मतलब है कि आप जानते हैं की वो सच नहीं है। आप जानते हैं कि आपके साथी ने [भाई / कोई इंसान] इसे या उसे नहीं किया है, लेकिन आप जाने-अनजाने में कायम हो जाते हैं की जैसे उसने किया हो। तो यह झूठ है और जो ऐसी कार्रवाई करता है, वह एक झूठा है। कुरान में अल्लाह (स व त) कहता है: "झूटों पर अल्लाह का अभिशाप है "। (सूरा
अल-इमरान 3: 62)।
तिर्मिदी की एक हदीस के अनुसार, झूठ बोलने से पाप होता है और पाप दोज़क की ओर ले जाता है। इतना ज़्यादा झूठ बोलने पर एक व्यक्ति को अंत में अल्लाह सर्वशक्तिमान की नज़रों में एक महान झूठा माना जाता है। झूठ बोलना उस व्यक्ति के योग्य नहीं है, जिसके पास ईमान है। यह एक शर्मनाक और एक अपमानित चीज़ है, जो एक व्यक्ति को अयोग्य बनाता है। इसलिए झूठ बोलना किसी योग्य व्यक्ति का काम नहीं है। एक अभ्यास को बढ़ावा और समर्थन देना, जो शरीयत की सीमा के बाहर है, वो भी झूठ कहलाया जायेगा। और यह, और भी गंभीर है क्योंकि यह पूरी आबादी को गुमराह कर सकता है। और यह झूठ भी बुहतान (buhtaan)(झूठा आरोप\ झूठी निंदा) के जैसे निशान है सर्वशक्तिमान अल्लाह और उसके रसूल (स अ व स)। इस प्रकार के व्यक्ति, जो यह सच नहीं है उस पर विश्वास रखते है। वह लोगों को विश्वास दिलाना चाहता है कि यह अल्लाह सर्वशक्तिमान की आज्ञा है और अल्लाह के दूत (स अ व स) का शिक्षण है, लेकिन फिर भी वह बहुत अच्छी तरह से जानता है कि यह सच नहीं है। वह ऐसा सिर्फ अपने भौतिक लाभ के लिए करता है और कभी-कभी वह ऐसा करता है, ताकि अन्य लोगों के सामने वह हास्यास्पद नहीं दिखाई दे।
कभी-कभी एक व्यक्ति, किसी ऐसी चीज के बारे में बात कर सकता है, जो सच नहीं है। लेकिन वह ऐसा किसी उद्देश्य से नहीं करता है; यह केवल गलती और भ्रम से है जो वह करता है।अगर कोई व्यक्ति इन प्रकार के शब्दों को कहने से पहले पूरी सावधानी बरतता है, तो वहाँ कोई रास्ता निकल सकता है। अगर वह इसे लापरवाही से करता है, तो वह सर्वशक्तिमान अल्लाह के सामने उसकी लापरवाही के कारण कसूरवार होगा। इसीलिए आपको दीन के बारे में बात करने से पहले बहुत सी सावधानियां बरतनी होंगी। आपको कुछ ऐसा घोषित नहीं करना चाहिए, जो आप नहीं जानते हैं। वहाँ ऐसे कई लोग हैं, जो इस तरह की गलती करते हैं, और यह ऐसी आम बात है कि कई बार उलेमा भी इस जाल में पड़ जाते हैं। वे कुरान और हदीसों के छंदों का दुर्व्याख्या करते हैं। और वे जनता को गुमराह करते हैं।
इसलिए, दीन के ज्ञान के बिना बोलना बहुत गंभीर और इसका पर्यायवाची होता है जो अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के साथ, जहाँ आप उन चीज़ों को कहते हैं, जो सच नहीं है। आपको यह ध्यान में रखना चाहिए कि वो सब कुछ, जो एक व्यक्ति संचय करता है और किसी व्यक्ति को धोखा देने के लिए कमाता है, अल्लाह सर्वशक्तिमान के भंडार उन लोगों के लिए जो ईमानदार और सत्यवादी हैं, उनकी तुलना में कुछ भी नहीं है। इस पर कुछ नहीं, वहाँ बहुत सीमित समय है। अगर आप वास्तव में, सर्वशक्तिमान अल्लाह की आँखों में सार्थक बनना चाहते हैं, तो इसलिए आपको सच्ची बात बतानी होगी, सत्य का अभ्यास करना होगा, सच्चाई पर बने रहना होगा, और सच्चाई का प्रसार करना होगा। आईये हम अपने सत्य की विशेषता/ गुण को ज़ाहिर करें। अल्लाह सच्चाई है, वह हमें अपनी ज़िंदगी सच्चाई के हित के साथ जीने और अभ्यास करने के लिए पसंद करता है। जब आप सत्य का अभ्यास करेंगें, तो वहाँ महान परीक्षाएं प्राप्त करेंगें, वहाँ सभी तरह के प्रलोभन होंगे जो हमें सच नहीं बताने के लिए लुभाएंगें। लेकिन आपको यह पता होना चाहिए कि एक सच बोलने के लिए उसकी कीमत चुकानी पड़ती है। वहाँ कई चीजें ऐसी भी हैं जिन्हें हम खो देंगे। लेकिन अल्लाह तआला की खातिर हमें हार को भी स्वीकार करना होगा। और यह नुकसान कुछ भी नहीं दरसाता है, इससे पहले कि हम और अधिक इंतजार करें। यह व्यर्थ का नुकसान नहीं है कि आपको इसका खेद होगा। यह एक विशेष नुकसान है, जो आपको सफलता के साथ उसका ताज पहनाएगा। यह एक ऐसा नुकसान है कि जैसे एक बीज फलों से लदे बड़े पेड़ को जन्म देने के लिए कष्ट भुगतता है।
इसलिए, मुझे आशा है कि सभी मुसलमान और विशेष रूप से जमात उल साहिह अल इस्लाम के हमारे सदस्य अल्लाह (स व त) की विशेषताओं / गुणों पर दिए गए, सभी स्पष्टीकरणों को प्रतिबिंबित करेंगें; और आईये हम अल्लाह के गुणों को रोज़आना पढ़ने का अपना कर्तव्य बना लें , इंशाअल्लाह। और इंशा-अल्लाह, रमज़ान का मुबारक महीना आ रहा है [जल्द]। आशा है, सामान्य तौर पर हर मुस्लमान - हम सभी - इन धन्य दिनों का लाभ उठाएं और अल्लाह कि ओर अधिक से अधिक मुड़ें ,ताकि उसकी प्रसंशा को हासिल कर सकें, और आईये, हम सब इन कठिन वक्त में अल्लाह से मानवता पर दया करने के लिए दुआ करें और दुनिया को उसके ज़िक्र (स्मरण) और मान्यता में पुनर्जीवित कर सकें। सामान्य रूप में, आधिकारिक तौर पर बोलना कि , हम दो मिलियन COVID-19 पॉजिटिव केस में बढ़ोत्तरी कर चुके है और 145,000 से अधिक मौतें हुईं हैं। मैं
इस कुरान के छंद के साथ अंत करता हूँ:
"लेकिन आइन्दा के जीवन कि तुलना में इस दुनिया का आनंद कम है। " (सूरह अत-तौबा
9: 38)।